Saturday, 3 September 2022

INS Vikrant क्यों है खास? जानें कैसे भारत की बढ़ेगी ताकत

 


INS Vikranta

                                         INS Vikranta

 हालाँकि इसका बनना फरवरी 2009 में आरम्भ हुआ, लेकिन इसकी बनावट इत्यादि 1999 से ही तैयार किये जाने लगे। यह 29 दिसम्बर 2011 को पहली बार तैरा. भारत ने 1957 में ब्रिटेन से एक जंगी जहाज खरीदकर उसे आईएनएस विक्रांत का नाम देकर 1961 में भारतीय नौसेना में शामिल किया था. "विक्रमादित्य" एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है "सूर्य की तरह प्रतापी"यह एक आधुनिक विमान वाहक पोत है जिसका वजन लगभग 40000 मीट्रिक टन है।STOBAR संरचना वाला विमानवाही पोत है। इसे दो शाफ्टों पर मौजूद जनरल इलेक्ट्रिक एल एम 2500+ गैस टर्बाइनें उर्जा देती/चलाती है। ये गैस टर्बाइनें 80 मेगावाट  (1,10,000 अश्वशक्ति) पैदा करतीं है।

·        आई एन एस विक्रमादित्य को सौंप दिए जाने की घोषणा अगस्त 2008 को हुई, जिससे इस विमान वाहक पोत को भारतीय नौसेना के सेवानिवृत होने वाले एकमात्र हल्के विमान वाहक आई एन एस विराट की ही तरह सेवा की अनुमति मिल गयी। 
·         आई एन एस विक्रमादित्य को सौंप दिए जाने की घोषणा अगस्त 2008 को हुई, जिससे इस विमान वाहक पोत को भारतीय नौसेना के सेवानिवृत होने वाले एकमात्र हल्के विमान वाहक आई एन एस विराट की ही तरह सेवा की अनुमति मिल गयी। 
·         भारत में बना पहला विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) आज भारतीय नौसेना (Indian Navy) में शामिल हो गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने केरल के कोच्चि (Kochi) में एक भव्य समारोह में आईएनएस विक्रांत को भारतीय नौसेना शामिल किया. इस विहानवाहक पोत का वजन करीब 45 हजार टन है और इसे बनाने में तकरीबन 20 हजार करोड़ रुपये की लागत आई है. 
·         इस अवसर पर पीएम मोदी ने नए नौसैनिक ध्वज का भी अनावरण किया. नए ध्वज के ऊपरी हिस्से में एक तरफ राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को शामिल किया गया है.
·         अभी तक नौसेना के ध्वज में क्रॉस ऑफ सेंट जॉर्ज बना था, इसके बीच में अशोक चिन्ह था, उसे हटा दिया गया है. नए ध्वज में नीले रंग के बैकग्राउंड में सुनहरे रंग से अशोक चिन्ह बना हुआ है. नीचे सत्यमेव जयते लिखा है. अशोक चिन्ह छत्रपति शिवाजी महाराज की शाही मुहर पर बनाया गया है.
·          ध्वज में नीचे संस्कृत भाषा में भारतीय नौसेना का आदर्श वाक्य 'शं नो वरुणः' यानी 'जल के देवता वरुण हमारे लिये शुभ हों
·         ध्वज में नीचे संस्कृत भाषा में भारतीय नौसेना का आदर्श वाक्य 'शं नो वरुणः' यानी 'जल के देवता वरुण हमारे लिये शुभ हों
·         अभी तक भारत के पास केवल एक विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य था, जिसे रूस में बनाया गया था. भारतीय रक्षा बल कुल तीन एयरक्राफ्ट कैरियर की मांग कर रहे थे, जिन्हें हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी में दो मुख्य नौसैनिक मोर्चों पर तैनात किया जाना है और एक अतिरिक्त रखना है.
·          INS Vikran भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होकर देश को अहम अतिरिक्त जंगी जहाज का अवसर देता है यानी अब पूर्वी और पश्चिमी दोनों समुद्री तटों पर एक-एक विमानवाहक पोत तैनात किया जा सकता है अपनी समुद्री उपस्थिति का विस्तार किया जा सकता है.



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